QR कोड की आधुनिक तकनीक सीधी जिले के प्रत्येक पुलिस थाने में, कोतवाली थाने में आयोजित हुए वर्चुअली संबोधित मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यक्रम संपन्न

QR कोड की आधुनिक तकनीक सीधी जिले के प्रत्येक पुलिस थाने में 
न्याय और सुरक्षा का नया अध्याय: राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर एवं जिला पुलिस सीधी की ऐतिहासिक संयुक्त पहल; मूक-बधिर अनुकूल एवं समावेशी जिला बना सीधी*

भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश (सुप्रीम कोर्ट) सूर्यकान्त के कर-कमलों से ‘संकेत संवाद मध्यस्थता केन्द्र’ का हुआ भव्य ई-लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में जबलपुर के मुख्य समारोह से वर्चुअली जुड़ा जिला सीधी का कोतवाली थाना

कार्यालय पुलिस अधीक्षक जिला सीधी मध्य प्रदेश
धर्मेंद्र सिंह बघेल पत्रकार सीधी
9993436274
सीधी / जबलपुर आज दिनांक: 16.05.2026
मध्य प्रदेश का सीधी जिला आज कानूनी और पुलिसिंग व्यवस्था में संवेदनशीलता तथा समावेशन (Inclusion) की एक नई और अनूठी मिसाल बनकर उभरा है। मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के तत्वाधान में और पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कोरी के कुशल मार्गदर्शन व प्रशासनिक नेतृत्व में सीधी जिले में एक अभूतपूर्व व्यवस्था स्थापित की गई है, जिसके अंतर्गत जिले के सभी पुलिस थानों को मूक-बधिर नागरिकों के लिए पूरी तरह सुलभ, बाधा-रहित और ‘मूक-बधिर अनुकूल’ (Inclusive) बना दिया गया है।
इसी ऐतिहासिक कड़ी में आज दिनांक 16-05-2026, शनिवार को जबलपुर में आयोजित मुख्य गरिमामयी समारोह के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर, पुलिस थाना कोतवाली, जिला सीधी (म.प्र.) में *’संकेत संवाद मध्यस्थता केन्द्र’* (साइन लैंग्वेज आधारित विशेष मध्यस्थता केन्द्र) का भव्य ई-लोकार्पण संपन्न हुआ।
इस केंद्र का *ई-लोकार्पण भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त (न्यायाधिपति एवं मुख्य संरक्षक, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली)* के कर-कमलों द्वारा वर्चुअली किया गया। मुख्य कार्यक्रम जबलपुर में आयोजित हुआ, जिसके समानांतर सीधी के थाना कोतवाली में स्थानीय गरिमामयी कार्यक्रम संपन्न हुआ।
*मुख्य अतिथि एवं गरिमामयी उपस्थिति*
जबलपुर में आयोजित मुख्य समारोह में डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश शासन एवं अर्जुन राम मेघवाल (माननीय केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री – स्वतंत्र प्रभार) मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
*सीधी जिला मुख्यालय (थाना कोतवाली) पर स्थानीय सहभागिता*
जबलपुर के मुख्य आयोजन से सीधे जुड़ते हुए सीधी कोतवाली थाने में स्थानीय न्यायिक, प्रशासनिक और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं:
*न्यायिक एवं प्रशासनिक विंग:* जिला एवं सत्र न्यायाधीश पी. एल. दिनकर, जिला कलेक्टर सीधी विकास मिश्रा, विशेष न्यायाधीश यतीन्द्र कुमार गुरु, एडीजे रविंद्र शर्मा, एडीजे राकेश कुमार सोनी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार वर्मा, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सोनू जैन तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी धीरज आर्या।
*जिला विधिक शाखा* (मुख्य संचालक) मुकेश कुमार शिवहरे (सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) एवं मनीष कौशिक (जिला विधिक सहायता अधिकारी)। यह केंद्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सीधे संचालन और देखरेख में कार्य करेगा।
*पुलिस प्रशासन:* अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अरविंद श्रीवास्तव, थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक अभिषेक उपाध्याय एवं थाना प्रभारी यातायात निरीक्षक भूपेश बैस एवं सीधी पुलिस का स्टाफ।
*विशेषज्ञ एवं सामाजिक संगठन:* भोपाल से आईं सांकेतिक भाषा अनुवादक सुश्री अपराजिता पाण्डेय, मूक बधिर सेवा संघ जिला सीधी के सचिव विपिन कुमार मिश्रा, धीरेंद्र जायसवाल (मध्यस्थ संवाद मऊगंज) और राहुल शाह (मध्यस्थ संवाद सिंगरौली)।
*सीधी जिले की मूक-बधिर अनुकूल व्यवस्थाएँ और थाना स्तर पर इसके लाभ:*
*संकेत संवाद मध्यस्थता केन्द्र:* थाना कोतवाली में स्थापित यह विशेष केंद्र अदालती और कानूनी मामलों के त्वरित, सौहार्दपूर्ण व भाषामुक्त निराकरण में मील का पत्थर साबित होगा।
*QR कोड की आधुनिक तकनीक:* सीधी जिले के प्रत्येक पुलिस थाने में विशेष क्यूआर (QR) कोड स्थापित किए गए हैं। मूक-बधिर व्यक्तियों द्वारा इस क्यूआर कोड को स्कैन करते ही वीडियो कॉलिंग के माध्यम से वे सीधे सांकेतिक भाषा विशेषज्ञ (Sign Language Interpreter) से जुड़ जाएंगे। इसके बाद इंटरप्रेटर द्वारा पीड़ित की शिकायत को समझकर तुरंत ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी को नोट करा दिया जाएगा।
*थाना स्तर पर क्रांतिकारी बदलाव :* इस केंद्र के खुलने और थानों में क्यूआर कोड की व्यवस्था होने से मूक-बधिर पीड़ितों को अब अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी तीसरे व्यक्ति (attendant) पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे न सिर्फ उनके आत्मसम्मान की रक्षा होगी, बल्कि थाना स्तर पर पुलिस अधिकारियों को भी पीड़ितों के बयान बिना किसी त्रुटि या गलतफहमी के हूबहू समझने में मदद मिलेगी। यह व्यवस्था थानों में पारदर्शिता लाएगी और पुलिस व समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के बीच के फासले को पाट देगी।
*तकनीकी एवं सामाजिक सहयोग:* इस पूरी मुहिम को धरातल पर उतारने में ‘आनंद सर्विस सोसाइटी’ के ज्ञानेंद्र पुरोहित और श्रीमती मोनिका पुरोहित का महत्वपूर्ण तकनीकी और सामाजिक योगदान रहा है। उनके सहयोग से ही पुलिस प्रशासन इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू कर पाया है।
*अन्य शहरों के लिए रोल मॉडल*
सीधी पुलिस और विधिक सेवा प्राधिकरण की इस अभूतपूर्व सफलता और अनूठे मॉडल को देखते हुए अब मध्य प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों जैसे इंदौर, जबलपुर, रीवा और भोपाल में भी इसी तरह के मूक-बधिर अनुकूल समावेशी मध्यस्थता केंद्र खोलने की तैयारी की जा रही है।
