*वन विकास निगम सीधी: करोड़ों का सागौन-बांस, लेकिन आदिवासी के हाथ खाली — 60 साल लीज वाला खेल फिर शुरू?

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*वन विकास निगम सीधी: करोड़ों का सागौन-बांस, लेकिन आदिवासी के हाथ खाली — 60 साल लीज वाला खेल फिर शुरू*

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धर्मेंद्र सिंह बघेल, पत्रकार, एमजे पत्रकारिता, सीधी
9993496274

*सीधी।* मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम, प्रक्षेत्र सीधी इस समय जिले में 5 बड़ी योजनाओं के नाम पर करोड़ों का कारोबार कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लाभ ठेकेदार और निगम के अफसरों तक ही सीमित है। सीधी जैसे आदिवासी जिले में जंगल तो कट रहे हैं, पर विकास नहीं दिख रहा।

*निगम सीधी में क्या-क्या योजना चल रही है? — ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट*

*1. बिगड़े वन सुधार और सागौन रोपण योजना (60 साल लीज मॉडल):*
सीधी में लगभग 40% जंगल बिगड़ा वन घोषित है। निगम ने इसे PPP मॉडल पर 60 साल की लीज पर देने की तैयारी शुरू कर दी है। आरोप है कि सागौन के नाम पर पुराने कीमती पेड़ काटकर नए रोपण के नाम पर बजट खाया जा रहा है। 50% मुनाफा निजी कंपनी को, 30% निगम को और 20% वन समिति को — पर सीधी की समितियों को 20% भी नहीं मिल रहा।

*2. बांस मिशन और बांस डिपो योजना:*
सीधी के कुसमी, मड़वास, सिहावल रेंज में बांस कटाई जोरों पर है। निगम का बांस डिपो मझौली में चल रहा है, जहां बांस बिचौलियों को कौड़ियों के दाम में दिया जा रहा है और बाहर महंगे में बेचा जा रहा है। बांस कारीगरों को कोई लाभ नहीं।

*3. इमारती लकड़ी और जलाऊ नीलामी योजना:*
सागौन, साजा, खैर की लकड़ी का डिपो सीधी में करोड़ों की नीलामी करता है। सवाल — नीलामी पारदर्शी है या सेटिंग से? स्थानीय ठेकेदारों का आरोप है कि बाहर के ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

*4. तेंदूपत्ता, महुआ, आंवला (लघु वनोपज) संग्रहण:*
सीधी में सबसे बड़ा रोजगार तेंदूपत्ता है। निगम संग्रहण कराता है, पर भुगतान में 3-3 महीने की देरी, बोनस में कटौती और फर्जी फड़मुंशी के आरोप हर साल लगते हैं।

*5. कार्बन क्रेडिट और औषधीय पौधा योजना:*
नए जमाने की योजना — जंगल से कार्बन क्रेडिट बेचकर कमाई। पर इसका हिसाब सीधी की जनता को कौन देगा? औषधीय पौधों की खेती के नाम पर नर्सरी घोटाले की भी चर्चा है।

*तीखा सवाल —*
– सीधी प्रक्षेत्र में पिछले 3 साल में कितनी लकड़ी कटी और कितनी बिकी? आय-व्यय का बोर्ड क्यों नहीं लगा?
– बिगड़े वन सुधार के नाम पर कितने पेड़ काटे गए?
– वन समितियों को 20% का हिस्सा मिला या कागजों में ही बांट दिया गया?
– मझौली बांस डिपो का ऑडिट कौन करेगा?

> “वन विकास निगम का मतलब बन गया है — वन विनाश निगम। जंगल सीधी के, मुनाफा बाहर वालों का।” — स्थानीय आदिवासी नेता

इनका कहना
निगम के अधिकारियों ने इस संबंध में कोई भी आधिकारिक जवाब नहीं मिला है क्योंकि अधिकारी जो बन विकास निगम में बैठते हैं वह सिर्फ कार्यालय में बैठकर हेरा फेरी करने में आ रहे हैं बात होती तो उनका भी पक्ष रखा जाता है!

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