
*सीधी में सड़क नहीं, भ्रष्टाचार का डामरीकरण! PWD सब-डिवीजन बना वसूली का अड्डा*

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धर्मेंद्र सिंह बघेल*
*एमजे पत्रकारिता, सीधी (म.प्र.)*
*मो. 9993496274*
*सीधी।* तस्वीर में दिख रहा है *कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी, लोक निर्माण विभाग (म/स) उप संभाग सीधी* का बोर्ड, लेकिन अंदर का सच इस बोर्ड से बिल्कुल उल्टा है। सीधी और मड़वास में सड़कों के नाम पर जनता के करोड़ों रुपये का बंदरबांट हो रहा है और इस खेल के सूत्रधार पर कोई कार्रवाई नहीं।
*खबर की 4 तीखी बातें जो विभाग की पोल खोलती हैं —*
*1. 50% में वर्क ऑर्डर, 100% भ्रष्टाचार:* सीधी जिले में सबसे बड़ा आरोप यही है — 50% कमीशन पर ठेकेदारों को वर्क ऑर्डर दिया जा रहा है। जब वर्क ऑर्डर ही आधे पैसे में होगा तो सड़क में गिट्टी की जगह क्या मिलेगा? यही कारण है कि सीधी की सड़कें बनने से पहले ही टूट जाती हैं।
*2. एसडीओ-पैसे-ठेकेदार का ट्रायंगल:* सूत्रों का दावा है कि एसडीओ कार्यालय और PWD के कर्मचारियों की ठेकेदारों के साथ गुप्त बैठकें और वसूली का खेल नया नहीं है। कई बार मामला सुर्खियों में आया, पर हर बार फाइलों में दबा दिया गया।
*3. किराए के मकान में सरकार:* करोड़ों के बजट वाला विभाग किराए की बिल्डिंग में क्यों चल रहा है? इसका हिसाब कौन देगा? किराए की बिल्डिंग में बैठकर ही सारे सौदे होते हैं, ये आरोप अब आम हो गया है।
*4. मड़वास से सीधी तक एक ही स्क्रिप्ट:* मड़वास और सीधी दोनों उपखंडों में एक ही पैटर्न — पैसा डकारो, सड़क को कागजों में चमकाओ। बारिश तो बहाना है, सड़कें तो भ्रष्टाचार से ही बह जाती हैं।
*सीधी की जनता पूछ रही है —*
वर्क आर्डर जब 50% लो होता है तो कैसे बनेगा घटिया सड़क?
> वर्क ऑर्डर का 50% किसकी जेब में जा रहा है?
> घटिया सड़क बनाने वाले ठेकेदार ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं?
> किराए की बिल्डिंग का किराया कौन तय करता है?
*अब नहीं चलेगा!*
सीधी जिले के युवा और पत्रकारों ने ऐलान किया है कि अगर 7 दिन के अंदर इन सड़कों की थर्ड पार्टी जांच नहीं हुई तो कलेक्टर कार्यालय का घेराव होगा और लोकायुक्त में शिकायत दर्ज होगी।
इनका कहना
एसडीओ से सपर्क नहीं हुआ सच्चाई क्या है क्या नहीं तो उनका भी बात रखा जाता।
