*सीधी PWD हेडक्वार्टर के निर्माण कार्यों का हिसाब कौन देगा? करोड़ों के काम, गुणवत्ता जीरो — उपयंत्री से SDO तक रडार पर?

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*सीधी PWD हेडक्वार्टर के निर्माण कार्यों का हिसाब कौन देगा? करोड़ों के काम, गुणवत्ता जीरो — उपयंत्री से SDO तक रडार पर*

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धर्मेंद्र सिंह बघेल*
*पत्रकार, एमजे पत्रकारिता, सीधी*
*मो. 9993496274*


*सीधी।* लोक निर्माण विभाग, उप संभाग सीधी मुख्यालय के अंतर्गत अब तक कितने निर्माण कार्य हुए हैं? कितनी सड़कों का डामरीकरण, कितने भवनों का निर्माण और कितनी मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये निकाले गए? और इन सब कामों में भ्रष्टाचार में लिप्त कौन-कौन से *उप यंत्री (Sub Engineer) और अनुविभागीय अधिकारी (SDO)* हैं? ये सवाल अब सीधी की जनता पूछ रही है।

*पत्रकार धर्मेंद्र सिंह बघेल की पड़ताल में सामने आए 3 बड़े सवाल —*

*1. हेडक्वार्टर के कामों का कोई हिसाब नहीं:* सीधी जिला मुख्यालय और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पिछले 3 साल में PWD द्वारा कराए गए सड़क, भवन और पुल-पुलिया के कार्यों की सूची आज तक सार्वजनिक नहीं की गई। कितने काम स्वीकृत हुए, कितने पूरे हुए और कितने कागजों में ही पूरे दिखा दिए गए, इसका कोई बोर्ड तक विभाग में नहीं लगा है।

*2. भगवानों के नाम पर भी कमीशन का खेल?* सूत्रों के अनुसार, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक भवनों के निर्माण कार्यों में भी गुणवत्ता से समझौता किया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भगवानों के स्थान तक के निर्माण में भी उपयंत्री और ठेकेदार की मिलीभगत से घटिया सामग्री लगाई गई है।

*3. उपयंत्री से SDO तक की चेन:* आरोप है कि हर काम में नीचे से ऊपर तक का प्रतिशत तय है। उपयंत्री बिल बनाता है, SDO पास करता है और ठेकेदार 50% में काम निपटाता है। इसी कारण सीधी की सड़कें 6 महीने भी नहीं टिकतीं। जनता पूछ रही है — इन कार्यों के लिए जिम्मेदार उपयंत्री और SDO कौन हैं? उनकी संपत्ति की जांच कब होगी?

*RTI से निकलेगा सच:*
इस पूरे मामले में अब *आरटीआई और लोकायुक्त शिकायत* ही एक रास्ता बचा है। मांग उठ रही है कि —

– सीधी PWD सब-डिवीजन में पिछले 5 साल के सभी स्वीकृत कार्यों की सूची, लागत और ठेकेदारों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।
– प्रत्येक कार्य के उपयंत्री और SDO का नाम और गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक हो।
– भ्रष्टाचार की जांच के लिए संभागीय स्तर की तकनीकी टीम से जांच कराई जाए।

> “सीधी में PWD का मतलब हो गया है — पैसा वाला विभाग। सड़क भगवान भरोसे है, बिल अधिकारी भरोसे।” — स्थानीय नागरिक

इनका कहना 

एसडीओ से संपर्क नहीं हुआ सच्चाई क्या है क्योंकि एसडओ पीडी बहुत कम बैटरी है विभाग जानकारी देती तो उनका भी बात रखा जता।

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