सीधी जिले में ब्रह्माकुमारी आश्रम में राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन हुआ संपन्न पत्रकारों को किया गया सम्मानित!

ब्रह्माकुमारी आश्रम में राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन हुआ संपन्न

धर्मेंद्र सिंह बघेल पत्रकार
सीधी जिले में भोपाल पन्ना सतना से चलकर राजयोगिनी अवधेश बहन दीदी पहुंची ब्रह्माकुमारी आश्रम सीधी राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे एवं रेखा बहन वह अर्चना बहन ने भी सीधी जिले में सभी प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पत्रकार बंधुओं को संबोधित करने का आवश्यक देकर मीडिया जगत पर प्रकाश डालते हुए कई पत्रकार भी अपनी बात रखें नंदलाल सिंह वरिष्ठ पत्रकार केपी श्रीवास्तव वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र सिंह बघेल पत्रकार, मनोज जयसवाल पत्रकार शोशांक शेखर मिश्रा, रमानायक तिवारी भी अपनी बात संबोधित की राजयोगिनी अवधेश बहन दीदी ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम को भी आगे बढ़ाया जिसमें वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश पांडे, आदित्य सिंह, अमित सिंह मिलकर दीप प्रज्वलन करते रहे

कार्यक्रम में शामिल रहे जिले के पत्रकार आनंद अकेला, राजेश सिंह चौहान, पुष्पेंद्र विश्वकर्मा, कनिष्क तिवारी, संजीव मिश्रा, हरीश चंद मिश्रा जगन्नाथ दुबे दी जितेंद्र सिंह चौहान, मनोज सिंह चौहान, ओंकार मिश्रा अनिल तिवारी, मृत्युंजय मिश्रा, सीधी जिले के पत्रकारों ने ब्रह्माकुमारी राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन कार्यक्रम में पहुंचकर राजयोगिनी अवधेश बहन दीदी से सम्मान प्राप्त करते हुए जिले की पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया

साथ में रागिनी अवधेश बहन दीदी ने अपनी संबोधन राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन जब मनुष्य का मन सेट हो जाए तो समझ लेना चाहिए कि सब कुछ ठीक हो गया आज के जमाने में शर्ट पैंट की सेट कोर्ट सेठ सोफा सेट हो गया लेकिन मनुष्य आज तक कहीं भी सेट नहीं हो पाया मन जब सेट हो जाएगा तभी आत्मा की शांति मिलेगी इस समय आप सभी को भोलेनाथ परमात्मा सब एक ही पिता है हम सब एक ही पिता के हैं परमात्मा ही सबसे बड़ा पिता है जिस तरह उन्होंने अपनी बातें रखी वहीं पर रेखा बहन भी अपनी मधुर गीत एवं प्रवचन कम शब्दों में करती हुई परमात्मा की बात करती रहे इसी तरह अर्चना बहन भी अपने मधुर गीत स्वर के माध्यम से परमात्मा एवं परमपिता के आशीर्वचन सभी मीडिया कर्मियों को संबोधित किया तो नन्ही सी बच्ची जिस तरह से आपने कलाओं के साथ सभी अतिथियों का नाच कर स्वागत करती हुई ब्रह्माकुमारी आश्रम में सीधी जिले में पहुंचकर कार्यक्रम करते रहे।
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सोशल मीडिया फेसबुक में मीडिया का फेक न्यूज़ कार मीडिया जगत को कलंकित करते हैं, डॉक्टर आदित्य मिश्रा
अपनी डफली अपना राग बढ़ा रहा मीडिया जगत, आदित्य मिश्रा
धर्मेंद्र सिंह बघेल पत्रकार
भारत सरकार और देश के अलग-अलग राज्यों की सरकारें अपने-अपने ढंग से विकास कार्य करती हैं लेकिन सोशल मीडिया के दौर में अपनी डफली अपना सूर राग अलाप रहा मीडिया और अभिव्यक्ति की आजादी और सिटीजन जर्नलिज्म के नाम पर कुछ भी लिखकर आनन-फानन में चर्चा बटोर लेने की चाहत वाली युवा पीढ़ी जब-तब असल मुद्दों से ध्यान भटका देती है। सोशल मीडिया के दौर में फेक न्यूज एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है। इस विषय पर चिंता तमाम संगोष्ठियों में जताई जाती हैं मगर इसका पुख्ता निदान मिलना एक चुनौती है। सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की पाबंदी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आड़े आता है वहीं इस विषय में ढील देना स्वछंदता और इसके दुरुपयोग को बढ़ावा देता है। राजनीति में भी सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। यहां भी फेक न्यूज की वहीं समस्याएं हैं। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे चर्चित नेता इन माध्यमों से लगातार जुड़े रहते हैं। जनसभाओं पर रोक के दौर में सोशल मीडिया पर जनसभाएं की जा रही हैं। दुनिया में कभी सांप-संपेरों का देश कहा जाने वाला हिंदुस्तान अपने नये तेवर से दुनिया को चकित करता जा रहा है। नेताओं ने जिस तेजी से डिजिटल इंडिया के दौर में प्रवेश किया, जनता भी उसी तेजी से फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफार्म पर बड़ी संख्या में उपस्थित है। यह डिजिटल इंडिया का ही करामात है कि नेहा सिंह राठौर जैसी एक सामान्य भोजपुरी गायिका ‘यूपी में का बा’ गीत के ज़रिये लाखों लोगों से जुड़ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यालय में उनकी मौजूदगी में बड़े से स्क्रीन के ज़रिये नेहा सिंह राठौर को सुना जा रहा है। सीएम योगी और पीएम मोदी ही नहीं साधारण विधायक और मंत्री भी अपने क्षेत्र की जनता से डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिये संवाद कर रहे हैं। सोशल मीडिया ने देश को आगे बढ़ने का एक रास्ता दे दिया है। देश के तमाम विकास के एजेंडों को सोशल मीडिया के तहत अमली जामा पहनाए जा रहे हैं। नये रेलों के संचालन का उद्घाटन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हो रहा है। एक क्लिक पर लाखों-करोड़ों मजदूरों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के खातों में पैसा ट्रांसफर हो रहा है।
अचानक से लॉकडाउन की शिकार हुई शिक्षा व्यवस्था ने जिस तेजी से इस माध्यम को अपनाया और रफ्तार पकड़ी कि विद्यार्थियों को इसकी आदत सी लग गयी है। प्रैक्टिकल कक्षाओं से वंचित रहने का दर्द उनकी जुबान पर आता तो है लेकिन परीक्षा के नाम पर वे ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन परीक्षाओं के विकल्पों की भी बात करने लग जाते हैं। शिक्षण संस्थान भी दोनों ढंग से कक्षाओं और परीक्षाओं को लागू करने के लिए कमर कस चुके हैं। नई व्यवस्था से किसी को कोई आश्चर्य नहीं होता। ‘वर्क फ्रॉम होम’ कल्चर के जरिये लाखों लोग घर बैठे काम को कुशलता से अंजाम दे रहे हैं। अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, रिलायंस डिजिटल जैसे बड़ी कम्पनियों से लेकर छोटे-छोटे किराना व्यवसायी तक डिजिटल माध्यमों से जुड़ गये हैं। होम डिलिवरी के ज़रिये लाखों युवाओं को रोजगार मिल रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ने सिनेमा उद्योग को एक मजबूत प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा दिया है। नई प्रवृत्ति के रोजगार मिल रहे हैं। नये-नये ऐप के ज़रिये लोगों तक सेवाएं पहुंच रही हैं और लोग इसके लिए भुगतान कर रहे हैं। नई व्यवस्था को देखते हुए भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय नई शिक्षा नीति में भी इसको स्थान दे रहा है। स्वयं पोर्टल के ज़रिये युवाओं को तमाम विषयों पर उपयोगी कोर्स करने की सुविधा दी जा रही है। डिजिटल इंडिया के दौर में नये-नये स्टार्ट-अप सामने आ रहे हैं। विश्वविद्यालयों में स्टार्ट-अप के लिए वातावरण तैयार किये जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्राइवेट विश्वविद्यालयों में अलग पहचान रखने वाला कानपुर स्थित रामा विश्वविद्यालय ने भी इस दिशा में मजबूती से कदम रखा है। गत जून माह में राइज-2021 नाम से आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम के ज़रिये विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों, शिक्षकों और यहां तक की विश्वविद्यालय के बाहर के युवाओं और उद्यमियों से अपने-अपने क्षेत्र में स्टार्टअप शुरु करने के लिए प्रस्ताव मांगे गये थे। जिसमें विश्वविद्यालय के अंदर के ही नहीं बाहर के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इस दिशा में आज भी रामा विश्वविद्यालय आगे बढ़ रहा है। रामा विश्वविद्यालय ही नहीं देश के अन्य अग्रणीय शैक्षणिक संस्थान भी इस दिशा में भारत सरकार और प्रदेश सरकार की इच्छानुसार आगे बढ़ रहे हैं। ये शैक्षणिक संस्थान वक्त की मांग को समझकर आगे की चुनौतियों के लिए युवाओं को तैयार करने में जुटे हैं। सबकुछ के बाद भी बड़ी आबादी वाले देश में तमाम विविधताएं और चुनौतियां मौजूद हैं। इन चुनौतियों के बीच सकारात्मक दृष्टिकोण रखने और अवसरों को भुनाने की क्षमता रखने वाले युवाओं के लिए आगे बढ़ने के लिए सबकुछ मौजूद है। तकनीकि क्षमता से लैस युवाओं वाला हिंदुस्तान आज तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। उक्त जानकारी
डॉ. आदित्य कुमार मिश्रा, विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, रामा विश्वविद्यालय, कानपुर
