जिला शिक्षा अधिकारी का आदेष बना शाला प्रमुख के लिये मुसीबत, अतिथि शिक्षक मनमानी पर उतारू ?

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सीधी (कमलेश्वर सिंह मझौली ) | खबर मध्य प्रदेश के सीधी जिला के मझौली जनपद शिक्षा केन्द्र अंतर्गत संचालित शासकीय षालाओं में विगत 02 वर्षो से रखे गये अतिथि शिक्षकों में 50 प्रतिषत अतिथि शिक्षक क्षक वरिष्ट कार्यालयों एवं शाला प्रमुखों के सगे संबंधी एवं चहेते होनें के कारण मनमानी पूर्ण रवैये से विद्यालय जाया करते थे। किन्तु जो भी अतिथि शिक्षक अपनी जिम्मेदारी या कार्यवाही के डर से समय से शाला में उपस्थिति होकर शैक्षणिक कार्य संपादित करते थे। वा भी जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश क्रमांक 5558 दिनांक 18/10/2019 से एक दम निडर होकर मनमानी पूर्ण रवैये से कार्य कर रहे है। यहां तक कि बिना सूचना के 3-4 शिक्षक वो भी ऐसी शालाओ से जिसमें एक भी रेगुलर शिक्षक पदस्थ नहीं है। एक दिन ही नहीं आते वहीं समय का कोई पावन्द नहीं है। 12 से 01 बजे तक बाजार या गांव में घूमते रहते है। बता दें कि कुछ ऐसे अतिथि शिक्षक भी हैं जो कि एक हप्ते तक लगातार अनुपस्थित रहते है। किन्तु वरिष्ट अधिकारियों के नजदीकी होनें के कारण शाला प्रमुख कार्यवाही करनें की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है। ऐसा ही ताजा मामला शासकीय प्राथमिक शाला करमाई एवं शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अमेढ़िया, हाई स्कूल अमेढ़िया, तथा प्राथमिक शाला में कार्यरत अतिथि शिक्षकों में देखनें को मिला कई ऐसे अतिथि शिक्षक भी है जो संस्कृत बोर्ड या भोज मुक्त विश्वविद्यालय एवं अन्य ऐसी संस्थाओ से योग्यता प्राप्त हैं जहां कक्षाएं संचालित नही होती नकल के सहारे डिग्री प्राप्त कर उभरती प्रतिभाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है। जबकि शाला प्रमुख एवं शाला प्रबंधन समिति को अधिकार प्राप्त है कि यदि शिक्षकों को पढ़ाना नहीं आता तो उसको हटाकर निचले स्तर के शिक्षक को आमंत्रित कर लिया जाय किन्तु वरिष्ट अधिकारियों या स्वयं के निकटतम होने या कमीशन के दम पर निकारनें की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं जागरण संवाददाता एवं अन्य मीडिया कर्मियों के सिरकत के बाद जैसे ही शासकीय एवं अतिथि शिक्षको की कमियों को उजागर किया जानें लगा वैसे ही जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा स्वतंत्रता जैसा आदेश पारित कर दिया गया जबकि विगत वर्ष से अतिथि शिक्षकों का भी मानदेय विगत वर्षो से दूना मासिक किया गया इतनें ही वेतन मान में कई विभागों में कार्यरत कर्मचारी रात दिन कार्य पर लगे रहते है। यहां तक कि बी.एल.ओ कार्य भी कराया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुये जिला शिक्षा अधिकारी अपनें आदेश में संशोधन करते है। या कि इसे दरकिनार कर शिक्षकों के मसीहा ही बनें रहेगें।

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