बिजली अभियंताओं के आन्दोलन का असर, हटाए गए सीओ रामपुर

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लखनऊ। बिजली अभियंता के साथ दुव्यवहार करने वाले सीओ रामपुर के खिलाफ प्रदेश भर में बिजली अभियंता आन्दोलन कर रहे है। बिजली विभाग के अभियन्ताओं, अवर अभियन्ताओं या अन्य कार्मिकों के साथ विभागीय कार्यों के दौरान मारपीट या दुव्र्यवहार करके उन्हेंकार्य न करनें देनेपर सरकार ने कड़ा रूख अख्तियार किया है। सरकार एक तरफ जहां अभियन्ता प्रोटेक्शन एवं प्रदेश में लागू करने पर विचार कर रही है वहीं अभिन्ताओं के साथ-मारपीट के मामले में रामपुर जनपद के क्षेत्राधिकारी आषुतोश तिवारी को जनपद से स्थानान्तरित कर पुलिस महानिदेशक कार्यालय लखनऊ से सम्बद्ध कर दिया गया है तथा शासन स्तर से उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाईभी चालू कर दी गयी है।

रामपुर में क्षेत्रधिकारी के कार्यालय में वहाॅ के अवर अभियन्ता एवं सहायक अभियन्ता के साथ पुलिस कर्मिकों ने मारपीट की थी। उक्त प्रकरण पर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री पंडित श्रीकान्त षर्मा ने आश्वासन दिया था कि दोशियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। ऊर्जा मंत्री का कहना है कि विद्युत चोरी रोककर आपूर्ति को बेहतर करने के महत्वपूर्ण कार्य में विद्युत कार्मिकों के साथ मारपीट या दुव्र्यवहार की घटनायें अत्यन्त चिंताजनक एवं दुखद हैं इससे विद्युत व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसी घटनायें न हो और विद्युत कर्मी पूरी सुरक्षा के माहौल में अपना कार्य कर सके यह सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाये जायेंगे। प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं कारपोरेशन अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया है कि ऊर्जा मंत्री पण्डित श्रीकान्त शर्मा के निर्देश पर षासन ने जिलाधिकारी कानपुर की अध्यक्षता में विद्युत चोरी की प्रभावी ‘उ0प्र0 विद्युत सेवाकर्मी और विद्युत सेवा संस्थान (हिंसा और सम्पत्ति की छति निवारण) अधिनियम 2018’ के परीक्षण हेतु गठित समिति की संस्तुतियां शासन को मिल गयी है जिसे शीघ्र लागू करने हेतु परीक्षण कराया जा रहा है। समिति ने विस्तृत अध्ययन के बाद यह संस्तुति दी है कि ‘उ0प्र0 विद्युत सेवाकर्मी और विद्युत सेवा संस्थान (हिंसा और सम्पत्ति की छति निवारण) अधिनियम 2018’ लागू किया जाये।विद्युत आपूर्ति एक ‘‘आवश्यक सेवा‘‘ है, अत प्रदेश में विद्युत चोरी की रोकथाम तथा विद्युत आपूर्ति बनाये रखने हेतु प्रस्तावित अधिनियम के बनाये जाने की आवश्यकता है।
क्राॅस एफ0आई0आर0 के मामलों में घटनाओं की प्राथमिक जांच उच्च स्तर के पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी द्वारा किये जाने के उपरान्त ही विधिक कार्यवाही किये जाने का प्रावधान हो। इस विशिष्ट कानून में न्यूनतम कारावास 06 माह व न्यूनतम जुर्माना 50000 रू0 का किया जाना भी उचित होगा। कानून की सीमा में विद्युत विभाग में कार्यरत संविदा कर्मियों को भी आच्छादित किया जाना प्रस्तावित है।सीमित ने सुझाव दिया है कि विद्युत चोरी को रोकने हेतु की जाने वाली रेड की कार्रवाई का मूवमेंट रजिस्टर रखा जाये व गोपनीय अभियानों में रेड करने वाले अधिकारी अपने से उच्च अधिकारी को संज्ञान में लेकर कार्यवाही करें व कृत कार्यवाही की वीडियों व फोटों साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखें।
दूसरी तरफ विद्युत अभियंताओं का आन्दोलन आज भी जारी रहा। विगत 24 अप्रैल 2019 को रामपुर के सीओ सिटी श्री आशुतोष तिवारी द्वारा अपने कार्यालय में विद्युत विभाग के सहायक अभियन्ता(मीटर) को बुलाकर स्वयं उनके द्वारा एवं उनके साथियों द्वारा सहायक अभियन्ता के साथ अभद्रता, मारपीट एवं जानलेवा हमला करने तथा नारकोटिक्स एक्ट एवं आर्म्स एक्ट के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दिये जाने के मामले में सीओ सटी रामपुर पर लगभग 02 माह पश्चात् भी कोई कार्यवाही न होने से आक्रोषित विद्युत अभियन्ताओं ने आज 01 घण्टे का कार्य बहिष्कार करते हुए अपना आन्दोलन और तेज करने की घोषणा करते हुए कल से अगले दो दिन 02 घण्टे का कार्य बहिष्कार करने का ऐलान किया। आज पूरे प्रदेश में विद्युत अभियन्ताओं ने 01 घण्टे का कार्य बहिष्कार करते हुए विरोध सभायें आयोजित की जिसमें विद्युत अभियन्ताओं ने आरोपी पुलिस अधिकारी को निलम्बित करने तथा उनके विरूद्ध ठोस दण्डात्मक कार्यवाही करने, विद्युत अभियन्ताओं को सुरक्षा की गारण्टी दिये जाने, ई-सुविधा सेवा प्रदाता कम्पनी के साथ तीन गुनी दरों पर किये गये अनुबन्ध को निरस्त करने की मांग की गयी। लखनऊ में शक्ति भवन पर विरोध सभा हुई जिसमें सैकड़ों की संख्या में अभियन्ता सम्मिलित हुए। अभियन्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार एवं ऊर्जा निगम प्रबन्धन ने विद्युत अभियन्ताओं को न्याय नहीं दिया तथा समय रहते मांगों पर सार्थक कार्यवाही न हुई तो और तीव्र आन्दोलन किया जायेगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी।

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