सीधी में पंचायत घोटाले का मास्टरमाइंड: टमसार का उमेश ट्रेडर्स और जैतवान ट्रेडर्स — एक ही बिल, 11 बार भुगतान, हर बिल 50 हजार के नीचे!*

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*सीधी में पंचायत घोटाले का मास्टरमाइंड: टमसार का उमेश ट्रेडर्स और जैतवान ट्रेडर्स — एक ही बिल, 11 बार भुगतान, हर बिल 50 हजार के नीचे!*

धर्मेंद्र सिंह बघेल, पत्रकार (MJ) सीधी — 9993496274

*सीधी।* ग्राम पंचायत भदौरा(और टमसार क्षेत्र) के भुगतान रजिस्टर की ये फोटो कई पंचायतों के घोटाले की पोल खोल रही है। आपके द्वारा भेजी गई भुगतान शीट में *कुल 4,68,101 रुपये* का खेल सिर्फ दो फर्मों के नाम पर किया गया है।

*फर्जी बिलों का कच्चा चिट्ठा — फोटो से खुलासा:*
क्रम फर्म का नाम राशि खेल क्या है?
1 जैतवान ट्रेडर्स 49,955 50 हजार के ठीक नीचे
2 जैतवान ट्रेडर्स 49,470 वही ट्रिक
3 जैतवान ट्रेडर्स 30,255
4 जैतवान ट्रेडर्स 19,586
5 जैतवान ट्रेडर्स 49,670
6 जैतवान ट्रेडर्स 49,620
7 जैतवान ट्रेडर्स 49,870
8 **उमेश ट्रेडर्स टमसार** **49,685**
9 **उमेश ट्रेडर्स टमसार** **49,990** टेंडर से बचने का क्लासिक आंकड़ा
10 **उमेश ट्रेडर्स टमसार** **49,990** सेम राशि, सेम फर्म
11 उमेश ट्रेडर्स 26,950
*कुल भुगतान — 4,68,101 रुपये*

*तीखे सवाल जो जनपद CEO से पूछे जाएंगे —*

*1. 49,990 की माया क्या है?* सरकार का नियम है — 50 हजार से ऊपर टेंडर लगेगा। इसलिए हर बिल 49,955, 49,990, 49,870 बनाया गया। ये संयोग नहीं, सोची-समझी फर्जी बिलिंग है।

*2. उमेश ट्रेडर्स टमसार में है क्या?* एक ही दुकान से एक ही दिन में 49,990 के दो बिल? माल क्या सप्लाई हुआ? रेत, सीमेंट, स्टेशनरी? स्टॉक रजिस्टर में एंट्री कहां है?

*3. जैतवान ट्रेडर्स और उमेश ट्रेडर्स का कनेक्शन?* दोनों फर्मों के बिल एक ही रजिस्टर में, एक ही हैंडराइटिंग में। क्या दोनों फर्में एक ही व्यक्ति की हैं?

*4. बिना जीएसटी बिल के भुगतान?* इन बिलों पर जीएसटी नंबर नहीं दिख रहा। तो क्या ये फर्जी लेटरपैड पर भुगतान हुआ है?

*5. सचिव-सरपंच-उपयंत्री की तिकड़ी?* बिना तकनीकी स्वीकृति और बिना भौतिक सत्यापन के 4.68 लाख का भुगतान कैसे हो गया? उपयंत्री, SDO और CEO जनपद रामपुर/सीधी ने आंखें क्यों मूंद लीं?

*ग्रामीणों का आरोप —*
“पंचायत में कोई काम नहीं हुआ, सिर्फ कागजों पर उमेश ट्रेडर्स और जैतवान ट्रेडर्स से माल खरीद दिखा दिया और पैसा निकाल लिया। टमसार में उमेश ट्रेडर्स की दुकान में इतना सामान कभी देखा ही नहीं।”

यह मामला लोकायुक्त में जाने लायक है। *50 हजार से नीचे बिल बनाकर टेंडर प्रक्रिया से बचना सीधा वित्तीय अनियमितता और IPC 420 का केस बनता है।*

इनका कहना
उमेश ट्रेडर्स से संपर्क नहीं हुआ नहीं तो उनका भी पक्ष रखा जाता।

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