मध्यप्रदेश के पास अभी 86 टैंकर, जरूरत 96 टैंकर की

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भोपाल । राज्यों में ऑक्सीजन की मारामारी के बीच केंद्र सरकार से मिले आवंटन के बाद भी मप्र अपने कोटे की करीब 50 से 60 टन ऑक्सीजन सप्लायर कंपनियों से नहीं ला पा रहा है। अभी भी टैंकरों की कमी बनी हुई है। मप्र के पास इस समय 86 टैंकर हैं, जबकि 10 टैंकरों की और जरूरत बनी हुई है। फिलहाल ऑक्सीजन के लिए बने टॉस्क फोर्स ने टैंकरों का रोटेशन ऐसा बनाया है, जिससे रिलायंस के जामनगर, लिंडे के भिलाई और राउरकेला, बोकारो, सेल भिलाई, मोदी नगर और हजारी प्लांट में निरंतर मप्र के टैंकर ऑक्सीजन भरने के लिए खड़े रहे। कुछ बीच रास्ते में हों और कुछ मप्र में ऑक्सीजन खाली करके तुरंत रवाना हो जाएं। इसी कारण मप्र अभी 490 से 500 टन ऑक्सीजन दूसरे राज्यों से ला पा रहा है। बाकी जरूरत के ऑक्सीजन के लिए मप्र ने स्थानीय स्तर पर ही 92 टन ऑक्सीजन जुटाना शुरू कर दिया है। इसमें 60-70 टन ऑक्सीजन उद्योगों से और बाकी नए ऑक्सीजन प्लांट व कंसंट्रेटर से ली जा रही है। केंद्र ने हाल ही में नाइट्रोजन और दूसरे रसायन ले जाने वाले टैंकरों को मोडिफाई करके ऑक्सीजन लाने युक्त बनाने की स्वीकृति दी है। मप्र को उम्मीद है कि अब टैंकरों की कमी खत्म होगी। वर्तमान में रोजाना 27 से 30 टैंकर मप्र ऑक्सीजन लेकर पहुंच रहे हैं।  इधर, सूत्रों का कहना है कि भोपाल-इंदौर में 110 से 130 टन ऑक्सीजन की खपत प्रतिदिन की बनी हुई है। इसके अलावा जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में भी डेढ़ सौ टन ऑक्सीजन की आवश्यकता है। साफ है कि खपत का आधा से ज्यादा ऑक्सीजन इन्हीं जगहों पर जा रहा है। छिंदवाड़ा का ऑक्सीजन प्लांट शनिवार को शुरू हो गया है, तो उससे भी सप्लाई बढ़ी है।

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