7 नवंबर से बंदरगाह सम्मेलन विशाखापत्तनम में!

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नई दिल्ली, 6 नवंबर। जहाजरानी राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) मनसुख मंडाविया आंध्र प्रदेश के  विशाखापत्तनम, में 7 नवंबर को पहले ‘बिम्‍सटेक बंदरगाह’ सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। यह सम्‍मेलन 7-8 नवम्‍बर को आयोजित किया जा रहा है। बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (बिम्‍सटेक) एक अंतर्राष्‍ट्रीय संगठन है, जिसमें दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के देश, भारत, बांग्‍लादेश, म्‍यामांर, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल शामिल हैं। सम्‍मेलन में इन देशों के क्षेत्रीय बंदरगाहों के प्रतिनिधि हिस्‍सा लेंगे।

उम्‍मीद है कि सम्‍मेलन में आयात-निर्यात तथा तटीय जहाजरानी को प्रोत्‍साहित कर आर्थिक सहयोग बढ़ाने की संभावना का पता लगाया जाएगा। सम्‍मेलन में विभिन्न निवेश के अवसरों और बंदरगाहों पर उत्पादकता और सुरक्षा के लिए अपनाए गए बेहतरीन तौर-तरीकों पर भी चर्चा की जाएगी। सभी सात सदस्‍य देशों के बंदरगाह क्षेत्र के साथ-साथ व्यापार और विभिन्न जहाजरानी संघों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस दो दिवसीय सम्मेलन में भाग लेंगे। सम्‍मेलन के दौरान पांच सत्र होंगे। पहला सत्र बंदरगाहों पर आधारित औद्योगिक और पर्यटन विकास पर होगा।

इस सत्र का उद्देश्य क्षेत्र में पर्यटन को प्रोत्साहित करने और बंदरगाहों के करीब औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने पर चर्चा करना है। बिम्सटेक राष्ट्रों की विविध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत इसे पर्यटन के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है, जिसमें जहाजों के जरिये पर्यटन को बढ़ावा देने में बंदरगाहों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आपूर्ति श्रृंखलाओं की राष्ट्रीय सीमाओं से परे विस्तार की जरूरत होने लगी हैं इसके बड़ते दायरे की वजह से माल ढुलाई की गतिविधियों में भी वृद्धि हुई है, जिससे बंदरगाहों के मौजूदा बुनियादी ढांचे पर काफी दबाव बनने लगा है।

ऐसे में उपलब्ध स्थान, संसाधनों, समय और ऊर्जा का दक्षता के साथ इस्‍तेमाल और उत्पादकता बढ़ाने के लिए को अधिकतम करने के लिए नए तकनीकी समाधानों को अपनाना समय की आवश्यकता है। दूसरा पैनल सत्र वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बंदरगाहों की बढ़ती भूमिका पर होगा। इस सत्र का उद्देश्य विस्तार आपूर्ति श्रृंखलाओं की पृष्ठभूमि और उपलब्ध समाधानों की पृष्ठभूमि में बंदरगाहों और टर्मिनलों की उभरती भूमिका पर चर्चा करना है।

पहले दिन का अंतिम सत्र ‘सुरक्षित और संरक्षित बंदरगाह’ विषय पर होगा।  इस सत्र का उद्देश्य उभरते खतरों और सुरक्षा खतरों पर चर्चा करना है, क्योंकि बंदरगाहों से न केवल महत्वपूर्ण व्यावसायिक हित जुड़े होते हैं, बल्कि यह रणनीतिक रूप से देश की महत्‍वपूर्ण सम्‍पत्ति भी हैं।

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