प्रदूषण न रोकने वाले पद पर रहने लायक नहीं – सर्वोच्च न्यायालय

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि प्रदूषण के लिए जो भी जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों की प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी है उनको पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। न्यायालय ने बुधवार को कहा कि खतरनाक स्तर का वायु प्रदूषण दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के करोड़ों लोगों के लिये जिंदगी-मौत का सवाल बन गया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वायु प्रदूषण पर अंकुश लगा पाने में विफल रहने के लिये प्राधिकारियों को ही जिम्मेदार ठहराना होगा।

दम घोंटने वाले वायु प्रदूषण में किसानों द्वारा पराली जलाये जाने के योगदान के मद्देनजर शीर्ष अदालत ने सोमवार को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मुख्य सचिवों को छह नवंबर को न्यायालय में पेश होने का निर्देश दिया था। दिल्ली और इससे लगे इलाकों में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए न्यायालय ने मंगलवार को इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए अलग से खुद एक नया मामला दर्ज किया। इस मामले में अन्य मामले के साथ ही बुधवार को सुनवाई हुई।

शीर्ष अदालत ने यह भी सवाल किया कि क्या सरकार किसानों से पराली एकत्र करके उसे खरीद नहीं सकती? दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दम घोंटने वाले वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुये पीठ ने कहा, ‘‘हम पराली जलाने और प्रदूषण पर नियंत्रण के मामले में देश की लोकतांत्रिक सरकार से और अधिक अपेक्षा करते हैं। यह करोड़ों लोगों की जिंदगी और मौत से जुड़ा सवाल है। हमें इसके लिये सरकार को जवाबदेह बनाना होगा।

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को ‘भयावह’ करार दिया था। साथ ही, क्षेत्र में निर्माण एवं तोड़-फोड़ की सभी गतिविधियों तथा कूड़ा-करकट जलाये जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। न्यायालय ने कहा था कि ‘आपात स्थिति से बदतर हालात’ में लोगों को मरने के लिये नहीं छोड़ा जा सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि उसके आदेश के बावजूद निर्माण कार्य एवं तोड़फोड़ की गतिविधियां करने वालों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए।

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