जिला परिवहन अधिकारी पर लाखों का जुर्माना

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लापरवाह अधिकारियों के लिये सबक।

एक फैसले ने अधिकारीयों को यह अहसास दिला दिया है कि यदि आप तय समय सीमा में काम नहीं करेंगे तो, हम उपभोक्ताओ के हितों को ध्यान में रखते हुए कानून का डंडा जरूर चलायेंगे।

ऐसा ही एक आदेश जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम ने जिला परिवहन अधिकारी पर किया है जिसमें उपभोक्ता को राहत देते हुए जिला परिवहन अधिकारी पर 1,00,000 आर्थिक जुर्माना 5000 मानसिक जुर्माना 2,000 वादव्यय जुर्माना परिवादी को दिए जाने हेतु आदेश किया असल में हुआ क्या अब सुनिये परिवादी कृपालसिह सोहल जोकि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में ठेकेदार का काम करते हैं उन्हें एक ठेका लेने के लिए रिंग मशीन की आवश्यकता थी, और रिंग मशीन वाहन का रजिस्ट्रेशन आरटीओ विभाग में होना जरूरी है।
परिवादी ने आनलाइन विधिवत वाहन के नामांतरण के लिए आवेदन दिया था, जिसका सत्यापन भी आरटीओ अधिकारी द्वारा किया गया था पर तय समय सीमा में परिवादी के नाम पर वाहन का नामांतरण नहीं किया गया, जिस कारण परिवादी को विभाग से जो लाखों का ठेका मिल सकता था वो नहीं मिल पाया, जिस पर परिवादी ने आरटीओ को लीगल नोटिस भी भेजा एवं सूचना के अधिकार से जानकारी भी चाही गई पर जिला आरटीओ अधिकारी की मनमानी देखिये कि कलेक्टर द्वारा जानकारी दिये जाने आदेश हो जाने के बाद भी परिवादी को दस्तावेज मुहैया नहीं कराये।

परिवादी ने व्यथित होकर माननीय जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद पेश किया, जिस पर तर्क बहस के बाद, माननीय न्यायालय फोरम द्वारा सेवा में कमी मानते हुए जिला परिवहन अधिकारी पर आर्थिक क्षति हेतु एक लाख, मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 5 हजार और वाद व्यय के लिए 2000 हजार का जुर्माना लगाया गया, यदि एक माह के अंदर भुगतान नहीं किया जाता तो 10% वार्षिक ब्याज भी देय होगा। परिवादी की तरफ से पैरवी अभिताभ स्थापक ने की।

फोरम के इस आदेश से जिलें में चर्चा का विषय बना हुआ है कि कोई कितना बड़ा अधिकारी क्यों ना हो, यदि उपभोक्ता जागरूक हैं तो वो ठगी का शिकार नहीं हो सकते और जिला उपभोक्ता फोरम हमेशा उपभोक्ताओ के हितों को ध्यान रखते हुए काम करता है । पर इसके लिए उपभोक्ताओं को भी जागरूक होना पडेगा।

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