रावण, मेघनाद, कुंभकरण, दशानन के प्रतीक पुतले धू-धूकर जले

जबलपुर, 9 अक्टूबर। धनुष यज्ञ रामलीला समिति के तत्वाधान में भगवान का अभिषेक पूजन मंगल महाआरती के मुख्य जजमान वित्त मंत्री तरूण भानोत, केन्ट बोर्ड के सी.ओ. डाॅ. अलोक चनसोरिया एवं आलोक मिश्रा, साथ ही रामलीला समिति के अध्यक्ष सीताराम कुरचानिया, व्यवस्थापक अभिषेक चैकसे, मधुर तिवारी, डाॅ. शंकर पाण्डे, दिनेश शुक्ला, विजय बाजपेई, नरेश तिवारी, शिवदत्त चैबे, संदीप चैकसे, मनोहर अग्निहोत्री, संतोष तिवारी, ग्वाािलयर से आये रामस्वरूप श्रीवास, डी.पी.कमल, प्रहलाद श्रीवास्तव, सतीश पाठक, धनंजय बाजपेई, आशीष पाठक, बन्नी महावर, रवि महावर, आदि के द्वारा आरती व सुमर्णी की गई। मुख्य वक्ता के रूप में वित्त मंत्री जी ने कहा भगवान राम सम्पूर्ण विश्व के अराध्य देव हैं। वे कणकण में विराजमान हैं इसी क्रम में अभिषेक चैकसे ने कहा सनातन परम्परा को प्रारंभ व विराम जैसे शब्दों में समेटा नहीं जा सकता। सनातन धर्म विश्व का सर्वश्रेष्ठ धर्म है, सीताराम कुरचानिया ने बताया भगवान राम व उनसे जुड़े अन्य पात्र बनने में जो आनंद प्राप्त होता है उसकी अनुभूमि शब्दों ब्याख्या नहीं की जा सकती इसी तरह डाॅ. अलोक चंसोरिया जी ने कहा बनारस में 1600 ईश्वी में राम लीला का मंचन प्रारंभ हो गया था यह हमारी सनातन परमपरा का आरंभ था।
द्वितीय चरण में रामलीला का मंचन हुआ जिसमें रावण और अहिरावण से युद्ध कर भगवान श्रीराम ने सत्य की विजय पताका फहराई व विभीषण का राज्य अभिषेक कर लंका राजा घोषित किया, सीता जी का अशोक वाटिका से आदर सम्मान के साथ भगवान राम से भेट कराकर सीता जी को सौप दिया।
दशहरा चल समारोह में आये हुये अनेक स्थानों से लोगों का हुजूम इकट्ठा जिन्होंने भगवान राम के खजाने के साथ आशीर्वाद लिया और 50 – 50 फुट के बने पुतलों को अग्निबाण के द्वारा आतिषबाजी के साथ अग्निदेव में समाहित किया गया। इस दृष्य से मनोरम दृष्य उत्पन्न हुआ, आर.सी.सी. मैदान में भगवान राम के जयकारे गुंजायमान हुये लोगों के द्वारा अद्भुत उमंग और उत्साह देखकर धनुष यज्ञ रामलीला के पात्र व रामलीला समिति के व्यवस्थापक अभिषेक चैकसे के नेत्रों से खुशी के आॅंसू छलक उठे। साथ ही इस रामलीला के स्व. पूर्व अध्यक्ष रमेश चैकसे को भी याद किया गया जिन्होने हाईटेक रामलीला की शुरूआत संस्कारधानी के इतिहास को रचा था जिसमें सजीवन रथ में युद्ध अग्निबाण का प्रयोग, अनेकों उपकरणों का उपयोग भी किया गया। इसकी सोच स्व. रमेश पहलवान को समरपण किया जाना चाहिये जो शदर के दशहरे और अखण्डता को प्रदर्शित करता है।
आकर्षण का केन्द्र-विद्युत साज सज्जा, बाजपेई तिवारी अखाड़ा, कलशधारी महिलायें, दाण्डिया नृत्य करती बच्चियाॅं, डुलडुल घोड़ी, बेण्डबाजा, 35 प्रतिमायें, जुलूस में शामिल हुई जो शदर बाजार, मोदीबाड़ा, गोरा बाजार, शीला टाकीज, आदि से आई हुई प्रतिमाये शामिल हुई। सभी जगहों जगहों पर स्वागत मंच भंडारा से आये हुये लोगों के साथ अमेरिका से आई हुई फेमली रमन अग्रवाल, चमन अग्रवाल से जुड़े हुये हैं रामलीला देखकर खुशी से झूम उठे। आज भरत मिलाप की लीला का मंचन होगा। यही पर आज की लीला को विराम दिया जाता है।
अपीलकर्तागण सीताराम कुरचानिया, अभिषेक चैकसे, मधुर तिवारी, धनंजय बाजपेई, संदीप चैकसे, शंकर पाण्डे, विजय बाजपेई, दिनेश शुक्ला, संजय शुक्ला, प्रकाश सोनी, प्रमोद तिवारी, बन्नी महावर, रवि महावर, रत्नेश अवस्थी, आशीष पाठक, सतीश पाठक, कैलाश श्रीवास्तव, नरेश तिवारी, राम स्वरूप, डी.पी. कमल, रमेश बिलबिलिया, शिवदत्त चैबे, आदि ।
