सभी विश्वविद्यालयों में अनिवार्य होगी नैक ग्रेडिंग : राज्यपाल

भोपाल, 1 अक्टूबर। राज्यपाल लालजी टंडन ने राजभवन में विश्वविद्यालयों की 97वीं राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक ली। श्री टंडन ने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई व्यवस्था का प्रारंभ हो रहा है। इसमें जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक पालन करने वाले पुरस्कृत होंगे और जिम्मेदारियों की उपेक्षा करने वाले दण्ड के भागी होंगे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्यपाल से लेकर द्वारपाल तक सभी पदों की जिम्मेदारी निर्धारित है। जिम्मेदारी का पालन नहीं करना असफलता है। राज्यपाल ने साफ शब्दों में कहा कि हर स्तर पर जवाबदारी के साथ कार्य की मॉनीटरिंग होगी। परिणाम नहीं देने वालों को सहन नहीं किया जायेगा।
सभी विश्वविद्यालय होंगे डिजिटल – राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जा रहा है। शीघ्र ही सभी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय डिजिटल हो जायेंगे। जानकारी दी गई कि आगामी 6 माह में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
नैक ग्रेडिंग अनिवार्य– राज्यपाल ने कहा कि बदलती परिस्थितियों में केवल उन्हीं शिक्षा संस्थानों का भविष्य है, जो नैक ग्रेडिंग प्राप्त होंगे। उन्होंने सचेत किया कि अनिवार्य रूप से शिक्षा संस्थान नैक ग्रेडिंग प्राप्त करें। अभी इस कार्य में उन्हें नैक का सहयोग भी दिलाया जा सकेगा। बाद में यह और अधिक कठिन हो जायेगा। भविष्य में नैक ग्रेडिंग के बिना उच्च शिक्षण संस्थान का संचालन संभव नहीं होगा।
न्यूनतम मूलभूत सुविधाओं का सर्वेक्षण करें विश्वविद्यालय
राज्यपाल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शैक्षणिक पर्यावरण आवश्यक है। पुस्तकालय, प्रयोगशाला, शैक्षणिक कैलेण्डर, हराभरा परिसर, शौचालय और स्वच्छता आदि मूलभूत व्यवस्थाएँ संस्थान में होना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिये कि सभी विश्वविद्यालय सर्वेक्षण कराकर मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति करें।
राजभवन से होगी मानीटरिंग — श्री लालजी टंडन ने बैठक के निर्णयों के समयबद्ध पालन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुलपति हर स्तर पर जवाबदारी के साथ कार्य व्यवस्था का निर्माण करें। परिणाम नहीं मिलने पर उत्तरदायी के विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जायेगी। राजभवन द्वारा इसकी गहन मानीटरिंग भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि परिणाम पहले दिन से ही दिखना चाहिये।
निजी और शासकीय विश्वविद्यालयों को समान रूप से करना होगा नई शिक्षा नीति का पालन
राज्यपाल ने कहा कि शासकीय और निजी विश्वविद्यालयों को नई शिक्षा नीति का पालन अनिवार्यत: समान रूप से करना होगा। नीति निर्धारण वैश्विक परिवर्तन और राष्ट्र की अपेक्षाओं के अनुरूप चिंतन के आधार पर किया जा रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों को बदलते परिवेश के अनुसार क्या करना है, इसका नक्शा तैयार करें। जो परिवर्तन किये जाने हैं, उसका रोड मेप बनाया जाये। व्यवस्थागत परिवर्तनों के साथ ही अनुशासन, नैतिकता, शिक्षा का स्तर और परिसर पर्यावरण के लिये आवश्यक कार्य चिन्हित कर उसका क्रियान्वयन करें।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य के नागरिक तैयार करते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि विद्यार्थियों को सामाजिक दायित्वों और समस्याओं का सफलतापूर्वक सामना करने के लिए परिसर में ही तैयार कर दिया जाये। स्वच्छता, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण आदि के संस्कार छात्र-छात्रों के व्यवहार में शामिल हों, ऐसी व्यवस्थाएँ की जायें। उन्होंने कहा कि ग्राम विकास की अनेक योजनायें संचालित हैं। इनके अन्तर्गत विश्वविद्यालय गांव को गोद लें। शिक्षक गांव में काम करने के लिए छात्र-छात्राओं को प्रेरित करें।
