हिंदी दिवस के मौके पर गृहमंत्री ने कही एक देश एक भाषा की बात!

नई दिल्ली, 14 सितंबर। हिंदी दिवस के मौके पर गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के विज्ञान भवन में आज ‘एक देश, एक भाषा’ की वकालत की तो हिंदी विरोधियों के तेवर तन गयी। इसके बाद फिर से बहस छिड़ गई। कई विपक्षी दलों के नेता भड़क गए। बंगाल से लेकर दक्षिण के राज्यों से तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। दरअसल, शाह ने कहा है कि पूरे देश की एक भाषा होना अत्यंत आवश्यक है जो दुनिया में भारत की पहचान बने। गृह मंत्री ने कहा कि आज देश को एकता की डोर में बांधने का काम अगर कोई भाषा कर सकती है तो वह सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी भाषा ही है। हालांकि ‘एक भाषा’ का उनका यह विचार AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीएमके चीफ स्टालिन समेत कई नेताओं को रास नहीं आया।
शनिवार को आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष एवं गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी। अमित शाह ने ट्वीट किया, ‘आज हिंदी दिवस के अवसर पर मैं सभी नागरिकों से अपील करता हूं कि हम अपनी-अपनी मातृभाषा के प्रयोग को बढ़ाएं और साथ में हिंदी भाषा का भी प्रयोग कर देश की एक भाषा के पूज्य बापू और सरदार पटेल के स्वप्न को साकार करने में योगदान दें।
भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना महत्व है परन्तु पूरे देश की एक भाषा होना अत्यंत आवश्यक है जो विश्व में भारत की पहचान बने। आज देश को एकता की डोर में बाँधने का काम अगर कोई एक भाषा कर सकती है तो वो सर्वाधिक बोले जाने वाली हिंदी भाषा ही है। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना महत्व है परंतु पूरे देश की एक भाषा होना अत्यंत आवश्यक है जो विश्व में भारत की पहचान बने। शाह ने कहा कि आज देश को एकता की डोर में बांधने का काम अगर कोई एक भाषा कर सकती है तो वह सर्वाधिक बोले जाने वाली हिंदी भाषा ही है।
ओवैसी ने ‘एक भाषा’ की डिबेट को हिंदुत्व से जोड़कर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘हिंदी हर भारतीय की मातृभाषा नहीं है। क्या आप इस देश की कई मातृभाषाएं होने की विविधता और खूबसूरती की प्रशंसा करने की कोशिश करेंगे।’ हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने आगे कहा कि अनुच्छेद 29 हर भारतीय को अपनी अलग भाषा और कल्चर का अधिकार देता है।
ओवैसी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए आगे लिखा कि भारत हिंदी, हिंदू, हिंदुत्व से भी बड़ा है। कुछ देर में ही चीफ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का ट्वीट आया। उन्होंने हिंदी में लिखते हुए हिंदी दिवस की बधाई दी और कहा कि हमें सभी भाषाओं और संस्कृतियों का समान रूप से सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हम कई भाषाएं सीख सकते हैं लेकिन हमें अपनी मातृभाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए। हिंदी दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। हमें सभी भाषाओं और संस्कृतियों का समान रूप से सम्मान करना चाहिए। हम कई भाषाएँ सीख सकते हैं लेकिन हमें अपनी मातृ-भाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए। इसके बाद दक्षिण से प्रतिक्रिया आई।
डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कहा, ‘हम लगातार हिंदी को थोपे जाने का विरोध कर रहे हैं। आज अमित शाह द्वारा की गई टिप्पणी से हमें आघात पहुंचा है, यह देश की एकता को प्रभावित करेगा। हम मांग करते हैं कि वह बयान वापस लें।’ स्टालिन ने बताया कि दो दिन बाद पार्टी की कार्यकारी समिति की बैठक होने वाली है जिसमें इस मुद्दे को उठाया जाएगा। अनेक भाषाएं, अनेक बोलियां कई लोगों को देश के लिए बोझ लगती हैं। मुझे लगता है यह हमारी देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। परंतु जरूरत है देश की एक भाषा हो, जिसके कारण विदेशी भाषाओं को जगह न मिले।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमारे पुरखों और स्वतंत्रता सेनानियों ने राजभाषा की कल्पना की थी और राजभाषा के रूप में हिंदी को स्वीकार किया था।” इससे पहले शाह ने एक विडियो संदेश में कहा था, ‘मैं देश के सभी नागरिकों से अपील करना चाहता हूं कि जब दुनिया के 20 प्रतिशत से ज्यादा लोग हिंदी में बात कर सकते हैं, हिंदी पढ़ सकते हैं, हिंदी में अपने विचारों की अभिव्यक्ति कर सकते हैं तो क्यों न उस दिशा में जाएं कि हिंदी दुनिया में सर्वाधिक बोलने वाली भाषा बने।
