चंद्रयान २ पर बोले पीएम- चंद्रमा को छूने की हमारी इच्छाशक्ति और बढ़ी

नई दिल्ली/बेंगलुरु, 7 सितंबर। भारत के चंद्रयान-2 का चांद पर उतरने से ठीक पहले संपर्क टूट गया और वैज्ञानिक परेशान हो उठे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए देश को को संबोधित करते हुए कहा है कि हम निश्चित रूप से सफल होंगे। इस मिशन के अगले प्रयास में भी और इसके बाद के हर प्रयास में भी कामयाबी हमारे साथ होगी। हर मुश्किल, हर संघर्ष, हर कठिनाई, हमें कुछ नया सिखाकर जाती है, कुछ नए आविष्कार, नई टेक्नोलॉजी के लिए प्रेरित करती है और इसी से हमारी आगे की सफलता तय होती हैं। ज्ञान का अगर सबसे बड़ा शिक्षक कोई है तो वो विज्ञान है। विज्ञान में विफलता नहीं होती, केवल प्रयोग और प्रयास होते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अपने वैज्ञानिकों से मैं कहना चाहता हूं कि भारत आपके साथ है। आप सब महान प्रोफेशनल हैं जिन्होंने देश की प्रगति के लिए संपूर्ण जीवन दिया और देश को मुस्कुराने और गर्व करने के कई मौके दिए। आप लोग मक्खन पर लकीर करने वाले लोग नहीं हैं पत्थर पर लकीर करने वाले लोग हैं। आज चंद्रमा को छूने की हमारी इच्छाशक्ति और दृढ़ हुई है, संकल्प और प्रबल हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हर मुश्किल, हर संघर्ष, हर कठिनाई, हमें कुछ नया सिखाकर जाती है, कुछ नए आविष्कार, नई टेक्नोलॉजी के लिए प्रेरित करती है और इसी से हमारी आगे की सफलता तय होती हैं। ज्ञान का अगर सबसे बड़ा शिक्षक कोई है तो वो विज्ञान है। विज्ञान में विफलता नहीं होती, केवल प्रयोग और प्रयास होते हैं।
मोदी ने कहा कि मैं सभी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के परिवार को भी सलाम करता हूं। उनका मौन लेकिन बहुत महत्वपूर्ण समर्थन आपके साथ रहा। हम असफल हो सकते हैं, लेकिन इससे हमारे जोश और ऊर्जा में कमी नहीं आएगी। हम फिर पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भले ही कुछ रुकावटें हाथ लगी हो, लेकिन इससे हमारा हौसला कमजोर नहीं पड़ा है, बल्कि और मजबूत हुआ है. आज हमारे रास्ते में भले ही एक रुकावट आई हो, लेकिन इससे हम अपनी मंजिल के रास्ते से डिगे नहीं हैं। आपको बताते जाए कि भारत के चंद्र मिशन को शनिवार तड़के उस समय झटका लगा, जब लैंडर विक्रम से चंद्रमा के सतह से महज दो किलोमीटर पहले इसरो का संपर्क टूट गया। अभी इसरो आंकड़ों का इंतजार कर रहा है। चांद से ठीक पहले चंद्रयान का संपर्क टूटने से वैज्ञानिकों के चेहरों पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं।
