करोड़पति रसूखदार आरोपियों की गिरफ्तारी कब?

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*करोडों का फर्जीवाडा करने वालों पर आखिर कब कसेगा गिरफ्तारी का शिकंजा*

बहुचर्चित बैंक आफ बडौदा करेली फर्जी लोन मामला जिसमें हम लगातार सच आप तक पहुँचा रहे हैं ताजा खबर यह है कि करेली थाने में धारा 420, 467, 468, 471, 477(क), 34 भादवि का प्रकरण दर्ज हो चुका है पर आरोपियों का फरार होना बडा सवाल खड़े कर रहा है ।
*अब मामला विस्तार से पढियेगा ।*
बैंक आफ बडौदा करेली के तत्कालीन बैंक मैनेजर अन्वेष मिश्रा और हर्षित लूनावत व अन्य सहयोगियों की मिलीभगत से धर्मेन्द्र उपाध्याय के फर्जी हस्ताक्षर कर 30 लाख का लोन स्वीकृत करा लिया गया और धर्मेन्द्र उपाध्याय की जानकारी के बिना ही उसके आधार कार्ड पेनकार्ड व अन्य दस्तावेजों का उपयोग फर्जी लोन में किया गया ।
धर्मेन्द्र के नाम से गोल्ड लोन उक्त बैंक के मैनेजर और हर्षित लूनावत की मां जोकि गोल्ड समीक्षक है के हस्ताक्षर से 9,54,000/ रूपये एवं 4,68,000/ रूपये निकाले गए ।
हर्षित लूनावत उनकी मां अर्चना लूनावत, बैंक मैनेजर अन्वेष मिश्रा, संदीप बाथ द्वारा एक राय होकर रुपयों का उपयोग कर आर्थिक लाभ लिया गया ।
इसी तरह एक अन्य व्यक्ति सतीश यादव के नाम से भी उक्त व्यक्तियों द्वारा फर्जी तरीके से फर्जी हस्ताक्षर कर गोल्ड लोन 3,35,000/रूपये एवं दूसरा गोल्ड लोन 6,50,000/ रूपये का लाभ लेकर उक्त राशि का उपयोग कर आर्थिक लाभ लेने के बाद बैंक में जमा किया।
खबर यह भी है कि ऐसे कई लोग हैं जिनके नाम से उक्त लोगों द्वारा फर्जी तरीके से लोन स्वीकृत कराकर ऐसे का उपयोग कर लोन बैंक में जमा किया इस प्रकार तत्कालीन बैंक मैनेजर अनिवेश मिश्रा सहायक मैनेजर संदीप बाथ चुका है अच्छा गोल्ड लोन समीक्षक अर्चना लुणावत एवं हर्षित लुणावत द्वारा कूट रजत दस्तावेज तैयार कर शिकायतकर्ता धर्मेंद्र उपाध्याय के साथ 59,22,000/रूपये और सतीश यादव से 9,85,000/रूपये का फर्जी तरीके से षडयंत्र पूर्वक लोन स्वीकृत कराकर हर्षित लूनावत के खाते में ट्रांसफर किए गए
पुलिस ने धारा 420, 467, 468, 471, 477(क), 34 भादवि का प्रकरण उक्त चारो पर बनाया गया । पर बड़ा सवाल यह है कि फर्जीवाडा करने वाले अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं हुये।

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