31 वर्षों की सेवा के बाद शिक्षक की भावुक विदाई, सैकड़ों छात्र-छात्राओं की आंखें हुईं नम, बोले—”सर, हम आपको घर नहीं जाने देंगे

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31 वर्षों की सेवा के बाद शिक्षक की भावुक विदाई, सैकड़ों छात्र-छात्राओं की आंखें हुईं नम, बोले—”सर, हम आपको घर नहीं जाने देंगे

सीधी। शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि अपने व्यवहार, संस्कार और स्नेह से विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा भी देते हैं। जब ऐसा शिक्षक अपने सेवा काल की अंतिम पारी पूरी कर विद्यालय से विदा होता है तो केवल एक कर्मचारी सेवानिवृत्त नहीं होता, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी समाप्त हो जाता है। ऐसा ही भावुक और अविस्मरणीय दृश्य सीधी जिले के मझौली विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गंजरी में देखने को मिला, जहां शिक्षक साधु साकेत की सेवानिवृत्ति पर आयोजित विदाई समारोह भावनाओं का ऐसा सैलाब बन गया कि विद्यालय परिसर में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

सैकड़ों छात्र-छात्राएं अपने प्रिय शिक्षक से बिछड़ने का दुख सहन नहीं कर पाए। जैसे ही विदाई का समय आया और साधु साकेत विद्यालय से अपने घर के लिए रवाना होने लगे, वैसे ही बच्चों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। कोई उनके पैरों से लिपट गया, कोई हाथ पकड़कर खड़ा हो गया तो कोई फूट-फूटकर रोने लगा। बच्चियों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। सभी एक ही बात कह रहे थे—”सर, आप हमें छोड़कर मत जाइए… हम आपको घर नहीं जाने देंगे।”

विद्यालय परिसर का यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां उपस्थित शिक्षक, शिक्षिकाएं, अभिभावक, ग्रामीण और अतिथि भी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सके। काफी देर तक बच्चों को समझाने का प्रयास किया गया। स्वयं साधु साकेत ने बच्चों को गले लगाकर, उनके सिर पर हाथ फेरकर और उन्हें उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद देकर समझाया, तब कहीं जाकर बच्चे शांत हुए और भारी मन से अपने प्रिय शिक्षक को विदा किया।

विद्यालय में आयोजित विदाई समारोह की शुरुआत मां सरस्वती एवं भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, जनप्रतिनिधि, स्थानीय ग्रामीण, पूर्व छात्र तथा बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। सभी ने साधु साकेत के व्यक्तित्व और कर्तव्यनिष्ठा की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए उन्हें सम्मानपूर्वक शॉल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं पुष्पहार भेंट कर भावभीनी विदाई दी।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षक साधु साकेत के सेवा जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि वे सीधी जिले के सेमरिया क्षेत्र के रामगढ़ टिकुटोला के निवासी हैं। उन्होंने अपने शैक्षणिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1995 में प्राथमिक पाठशाला कारीमाटी से की। यहां लगभग तीन वर्षों तक सेवा देने के बाद उनका स्थानांतरण 17 जुलाई 1995 को शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय हस्तिनापुर में हुआ, जहां उन्होंने तीन वर्ष तक अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद 21 जुलाई 1998 को उनका पदस्थापन माध्यमिक विद्यालय कुबरी में हुआ, जहां उन्होंने करीब 11 वर्षों तक विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की। बाद में 18 दिसंबर 2015 को उनका स्थानांतरण शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गंजरी में हुआ, जहां उन्होंने लगातार 11 वर्षों तक अपनी सेवाएं देकर विद्यालय और क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। शिक्षा विभाग में कुल 31 वर्षों की गौरवपूर्ण सेवा पूरी करने के बाद वे सेवानिवृत्त हुए।

विद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने बताया कि साधु साकेत केवल एक शिक्षक नहीं बल्कि बच्चों के अभिभावक, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत थे। उनका स्वभाव अत्यंत सरल, मधुरभाषी, मिलनसार और अनुशासित था। वे कभी भी विद्यार्थियों के बीच भेदभाव नहीं करते थे। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की हरसंभव सहायता करना उनकी आदत थी। कई ऐसे विद्यार्थी थे जिनके पास कॉपी, पेंसिल, किताबें या स्कूल ड्रेस खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे। ऐसे बच्चों की मदद साधु साकेत स्वयं अपने निजी खर्च से किया करते थे। समय पर किताबें उपलब्ध कराना, जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक सामग्री खरीदना, गरीब बच्चों को कपड़े दिलाना और हर परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाना उनकी पहचान बन चुकी थी।

ग्रामीणों ने भी बताया कि साधु साकेत ने केवल विद्यालय तक ही अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी, बल्कि समाज के हर वर्ग के लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनकर हमेशा सहयोग किया। उनके व्यवहार और सेवाभाव के कारण वे पूरे क्षेत्र में सम्मान और लोकप्रियता का प्रतीक बन गए थे।

विदाई समारोह में उपस्थित सभी वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक का वास्तविक सम्मान उसके वेतन या पद से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के प्रेम और सम्मान से होता है। साधु साकेत की विदाई के दौरान जिस प्रकार सैकड़ों छात्र-छात्राएं फूट-फूटकर रो पड़े, वह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि उन्होंने अपने जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बच्चों का विश्वास, स्नेह और सम्मान अर्जित किया है।

विद्यालय परिसर में लंबे समय तक भावुक माहौल बना रहा। कई छात्राएं लगातार रोती रहीं और अपने प्रिय शिक्षक को छोड़ने को तैयार नहीं थीं। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए जीवनभर यादगार बन गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शायद सीधी जिले में यह पहला अवसर होगा जब किसी शिक्षक की विदाई पर सैकड़ों छात्र-छात्राएं इस तरह भावुक होकर रो पड़े और अपने गुरु को घर जाने से रोकने लगे। यह केवल एक विदाई नहीं थी, बल्कि एक आदर्श शिक्षक के प्रति विद्यार्थियों के असीम प्रेम, सम्मान और विश्वास की ऐसी मिसाल थी, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं और यह संदेश दिया कि सच्चा शिक्षक वही है जो विद्यार्थियों के दिलों में हमेशा जीवित रहता है।

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