कोरोना कॉल की बढ़ती चुनौतियों को आगे बढ़ रहा देश ?

कोरोनाकाल की बढ़ती चुनौतियों के बीच आगे बढ़ रहा है देश

धर्मेंद्र सिंह बघेल पत्रकार
इस समय यूपी समेत पांच राज्यों में हो रहे चुनावों पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। कोरोना संकट के बीच इन राज्यों में चुनावों को सफलतापूर्वक सम्पन्न करा लेना चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती है। पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और उत्तर प्रदेश में हो रहे चुनावों में सबसे अधिक नज़र उत्तर प्रदेश पर लगी हुई है। इसका कारण यह है कि लोकसभा की 80 और राज्यसभा की 40 सीटों वाला यह राज्य केंद्र की राजनीति भी तय करता है। दुनिया में कोविड-19 की शुरुआत दिसंबर 2019 से हुई और मार्च 2020 से इसने हिंदुस्तान को भी गहराई से प्रभावित करना शुरु किया। मार्च 2020 में एक तरफ आम-जन होली की तैयारियों में जुटा था तो दूसरी ओर कोविड-19 तेजी से पैर पसार रहा था और उसी माह अचानक से लॉकडाउन की खबर आ गयी। तब से कभी ज्यादा तो कभी कम प्रतिबंधों के साथ जनता ने जीना सीख लिया। लोगों के रोजगार में कमी, निर्माण कार्यों में मंदी, पर्यटन और यातायात में कमी जैसी समस्याओं के बीच कृषि व कृषि संबंधित उद्योगों और दुग्ध उत्पादों के विपणन के अलावा अगर कुछ नहीं रुका और निरंतर आगे बढ़ा तो वह है डिजिटल संचार और डिजिटल व्यापार। शिक्षा में डिजिटल क्रांति आई है। नई पीढ़ी के युवा विद्यार्थी और शिक्षक ही नहीं उम्रदराज प्रोफेसर और कुलपति तक उत्साह से लबरेज होकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये शिक्षा का आदान-प्रदान करते नज़र आ रहे हैं।
संचार माध्यमों ने दुनिया की दशा और दिशा में व्यापक प्रभाव लाया है। यह सर्वविदित है कि संचार माध्यम किसी भी समाज और देश के विकास के लिए सबसे जरुरी उपकरणों में से एक हैं। आज संचार के सभी माध्यमों में डिजिटल माध्यम सब पर भारी हैं। डेटा पैक का सस्ता होना और मोबाइल की सहज उपलब्धता ने इस माध्यम को हर हाथ तक पहुंचा दिया है। सच्ची-झूठी हर न्यूज यहां से वहां शेयर की जा रही है। सच झूठ की पहचान से परे मिर्च-मसाला युक्त न्यूज चटकारे लेकर देखी-सुनी जा रही है। दूसरे शब्दों में कहें तो सोशल मीडिया के दौर में दुनिया वायरल न्यूज के पीछ भाग रही है। वायरल न्यूज की सच्चाई कुछ ही लोगों को पता हो पाता है मगर प्रथम दृष्ट्या मासूम लोग वायरल न्यूज को सच मान बैठते हैं और किसी विषय विशेष पर अपनी राय कायम कर लेते हैं। भारत सरकार और देश के अलग-अलग राज्यों की सरकारें अपने-अपने ढंग से विकास कार्य करती हैं लेकिन सोशल मीडिया के दौर में अपनी डफली अपना सूर राग अलाप रहा मीडिया और अभिव्यक्ति की आजादी और सिटीजन जर्नलिज्म के नाम पर कुछ भी लिखकर आनन-फानन में चर्चा बटोर लेने की चाहत वाली युवा पीढ़ी जब-तब असल मुद्दों से ध्यान भटका देती है। सोशल मीडिया के दौर में फेक न्यूज एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है। इस विषय पर चिंता तमाम संगोष्ठियों में जताई जाती हैं मगर इसका पुख्ता निदान मिलना एक चुनौती है। सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की पाबंदी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आड़े आता है वहीं इस विषय में ढील देना स्वछंदता और इसके दुरुपयोग को बढ़ावा देता है। राजनीति में भी सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। यहां भी फेक न्यूज की वहीं समस्याएं हैं। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे चर्चित नेता इन माध्यमों से लगातार जुड़े रहते हैं। जनसभाओं पर रोक के दौर में सोशल मीडिया पर जनसभाएं की जा रही हैं। दुनिया में कभी सांप-संपेरों का देश कहा जाने वाला हिंदुस्तान अपने नये तेवर से दुनिया को चकित करता जा रहा है। नेताओं ने जिस तेजी से डिजिटल इंडिया के दौर में प्रवेश किया, जनता भी उसी तेजी से फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफार्म पर बड़ी संख्या में उपस्थित है। यह डिजिटल इंडिया का ही करामात है कि नेहा सिंह राठौर जैसी एक सामान्य भोजपुरी गायिका ‘यूपी में का बा’ गीत के ज़रिये लाखों लोगों से जुड़ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यालय में उनकी मौजूदगी में बड़े से स्क्रीन के ज़रिये नेहा सिंह राठौर को सुना जा रहा है। सीएम योगी और पीएम मोदी ही नहीं साधारण विधायक और मंत्री भी अपने क्षेत्र की जनता से डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिये संवाद कर रहे हैं। सोशल मीडिया ने देश को आगे बढ़ने का एक रास्ता दे दिया है। देश के तमाम विकास के एजेंडों को सोशल मीडिया के तहत अमली जामा पहनाए जा रहे हैं। नये रेलों के संचालन का उद्घाटन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हो रहा है। एक क्लिक पर लाखों-करोड़ों मजदूरों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के खातों में पैसा ट्रांसफर हो रहा है।
अचानक से लॉकडाउन की शिकार हुई शिक्षा व्यवस्था ने जिस तेजी से इस माध्यम को अपनाया और रफ्तार पकड़ी कि विद्यार्थियों को इसकी आदत सी लग गयी है। प्रैक्टिकल कक्षाओं से वंचित रहने का दर्द उनकी जुबान पर आता तो है लेकिन परीक्षा के नाम पर वे ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन परीक्षाओं के विकल्पों की भी बात करने लग जाते हैं। शिक्षण संस्थान भी दोनों ढंग से कक्षाओं और परीक्षाओं को लागू करने के लिए कमर कस चुके हैं। नई व्यवस्था से किसी को कोई आश्चर्य नहीं होता। ‘वर्क फ्रॉम होम’ कल्चर के जरिये लाखों लोग घर बैठे काम को कुशलता से अंजाम दे रहे हैं। अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, रिलायंस डिजिटल जैसे बड़ी कम्पनियों से लेकर छोटे-छोटे किराना व्यवसायी तक डिजिटल माध्यमों से जुड़ गये हैं। होम डिलिवरी के ज़रिये लाखों युवाओं को रोजगार मिल रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ने सिनेमा उद्योग को एक मजबूत प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा दिया है। नई प्रवृत्ति के रोजगार मिल रहे हैं। नये-नये ऐप के ज़रिये लोगों तक सेवाएं पहुंच रही हैं और लोग इसके लिए भुगतान कर रहे हैं। नई व्यवस्था को देखते हुए भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय नई शिक्षा नीति में भी इसको स्थान दे रहा है। स्वयं पोर्टल के ज़रिये युवाओं को तमाम विषयों पर उपयोगी कोर्स करने की सुविधा दी जा रही है। डिजिटल इंडिया के दौर में नये-नये स्टार्ट-अप सामने आ रहे हैं। विश्वविद्यालयों में स्टार्ट-अप के लिए वातावरण तैयार किये जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्राइवेट विश्वविद्यालयों में अलग पहचान रखने वाला कानपुर स्थित रामा विश्वविद्यालय ने भी इस दिशा में मजबूती से कदम रखा है। गत जून माह में राइज-2021 नाम से आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम के ज़रिये विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों, शिक्षकों और यहां तक की विश्वविद्यालय के बाहर के युवाओं और उद्यमियों से अपने-अपने क्षेत्र में स्टार्टअप शुरु करने के लिए प्रस्ताव मांगे गये थे। जिसमें विश्वविद्यालय के अंदर के ही नहीं बाहर के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इस दिशा में आज भी रामा विश्वविद्यालय आगे बढ़ रहा है। रामा विश्वविद्यालय ही नहीं देश के अन्य अग्रणीय शैक्षणिक संस्थान भी इस दिशा में भारत सरकार और प्रदेश सरकार की इच्छानुसार आगे बढ़ रहे हैं। ये शैक्षणिक संस्थान वक्त की मांग को समझकर आगे की चुनौतियों के लिए युवाओं को तैयार करने में जुटे हैं। सबकुछ के बाद भी बड़ी आबादी वाले देश में तमाम विविधताएं और चुनौतियां मौजूद हैं। इन चुनौतियों के बीच सकारात्मक दृष्टिकोण रखने और अवसरों को भुनाने की क्षमता रखने वाले युवाओं के लिए आगे बढ़ने के लिए सबकुछ मौजूद है। तकनीकि क्षमता से लैस युवाओं वाला हिंदुस्तान आज तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
उक्त जानकारी
डॉ. आदित्य कुमार मिश्रा, विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, रामा विश्वविद्यालय, कानपुुर
