6 दिवसीय चतुर्वेद महायज्ञ का हुआ समापन, उमड़ा जनसैलाब

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नई दिल्ली, 14 अक्टूबर। विश्व हिन्दू परिषद् व अशोक सिंघल फाउंडेशन एवं झण्डेवाला देवी मंदिर के तत्वावधान में लक्ष्मी नारायण मंदिर (बिड़ला मंदिर) में छह दिवसीय चतुर्वेद स्वाहाकार महायज्ञ कार्यक्रम का भव्य समापन कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा (14 अक्टूबर 2019) को हुआ। इस भव्य कार्यक्रम में कई देशों एवं देश के सभी प्रांतों से वेदों के मानने वाले और सनातन धर्म में आस्था रखने वाले भक्तजन इस आयोजन में शामिल हुए।
श्रीश्रीश्री त्रिदंडी स्वामी रामानुजाचार्य जियर चिन्न स्वामी जी ने अपने 61 वेदपाठियों के साथ विस्तार पूर्वक वेद से सम्बन्धित छह दिवसीय आयोजन में होने वाली सम्पूर्ण प्रक्रिया से सम्बन्धित भक्तगणों का ज्ञानवर्धन किया। उन्होंने यज्ञ की प्रक्रिया को बताते हुए कहा कि यज्ञ में क्या और क्यों यह होता है तथा इसके पीछे का उद्देश्य बताया। वेद मंत्र कंठस्थ वेदपाठी, विद्वानों द्वारा अलग-अलग यज्ञ कुंडों में शुद्ध सस्वर उच्चारण करते हुए उन्होंने यज्ञ में पूर्ण आहुति देकर वेद भगवान यज्ञ का समापन वैदिक विधि विधान पूर्वक किया।
विश्व हिन्दू परिषद की प्रबन्ध समिति के सदस्य दिनेश चन्द्र ने बताया कि विश्व के कल्याण के लिए यह यज्ञ है। वेद के विषय में अनेक भ्रांतियां फैली हैं जैसे महिलाएं वेद नहीं पढ़-सुन नहीं सकतीं, कोई विशेष वर्ग नहीं सुन सकता यह सच नहीं है। उन्होंने बताया कि यजुर्वेद के 26वें मंडल के दूसरे अध्याय में बहुत स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वेदों का ब्रह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, नारी, सेवक कोई भी श्रवण, अध्ययन और पठन कर सकता है और किसी को भी उसका श्रवण करा सकता है।
वेद के बारे में फैले भ्रम इत्यादि दूर हो इसलिए दिल्ली में ऐसा महायज्ञ पहली बार हो रहा है। सामाजिक समरसता की दृष्टि से भी यह ऐतिहासिक है, इसमें झुग्गियों से लेकर महलों तक रहने वाले विभिन्न समाज नेता, धर्म नेता, राज नेता, सभी को बुला गया है वे सब शामिल हुए। दक्षिण के 61 आचार्य यहां आए हुए हैं जिनको वेद कंठस्थ हैं। घनपाठी विद्वान आए हैं जो शुरु से जो वाक्य पढ़ा उसे उसी स्वर में विपरीत दिशा में भी उसको उसी रूप में बोल सकते हैं ऐसे वर्षों में तैयार होने वाले घनपाठी विद्वान भी यहां आए हैं।

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