रांझी शासकीय अस्पताल में गरीब मरीजों से लूट जारी, वाटरमैन कर रहा लेखापाल का काम

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जबलपुर,  7 सितंबर । मध्य प्रदेश सरकार गरीबों के लिए स्वास्थ्य विभाग पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन इसका फायदा गरीबों को नहीं मिल पा रहा है उनके स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उनकी योजनाओं को केवल कागजी कार्यवाही कर फर्जी आंकड़ों तक ही सीमित करने में लगे हुए हैं।

शासकीय सिविल अस्पताल रांझी आए दिन सुर्खियों में बना रहता है। कर्मचारियों द्वारा एक के बाद एक कई कारनामों को अंजाम दिया गया और अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। सालों से चल रहा बड़े स्तर का भ्रष्टाचार, जी हां रांझी अस्पताल में वाटर मैन के पद पर कार्यरत कर्मचारी, पदस्थ वाटर मैन के पद पर हैं लेकिन पूरे अस्पताल में इनके बाहुबल की जड़ें फैली हुई हैं। आलम यह है कि इंचार्ज व लेखापाल का कार्य भी वाटर मैन से कराया जाता है इनका प्रभाव इतना है कि किसी भी प्रकार का क्रय-विक्रय हो इनकी इजाजत के बगैर नहीं होता। एक ताजा जानकारी पर मालूम हुआ है कि सालों पहले दान-दाताओं द्वारा दान किए गए बर्तन भी टेंट वाले को बेच दिए गए और अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

बिना किसी अधिकारी को जानकारी दिये, रोगी कल्याण समिति की रसीदों में भी शुल्क व नि:शुल्क वाली रसीदों में घपला किया जा रहा है इसके साथ ही जन चर्चा का विषय है कि अस्पताल निर्माण कार्य के लिए आयी टाइल्स भी कुछ कर्मचारियों के घर में लगी हैं। दबंग कर्मचारी इलेक्ट्रीशियन से अपने घरों में कार्य करवाते हैं बिल रांझी अस्पताल के नाम से बनता है। रांझी अस्पताल में सरकार हर जरूरत की दवाएं उपलब्ध कराती है, लेकिन बावजूद इसके कुछ मरीजों को पर्ची देकर बाहर से दवा मंगाई जाती है। इसी लापरवाही के चलते रांझी निवासी एक महिला की नसबंदी ऑपरेशन के दौरान मृत्यु हो चुकी है।

लोगों की मानें तो इस बात की शिकायत कई बार जिला प्रशासन से की जा चुकी है। आला अधिकारियों को विकास कार्य दिखाकर वापस कर देते हैं। स्वास्थ्य विभाग कितना सजग है, इस बात का अंदाजा ऐसेे लगाया जा सकता है कि जब से अस्पताल बना है तब से कई जिला अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी बदल गए लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

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